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Aparajita plant, अपराजिता के फायदे और नुकसान

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Aparajita plant. अपराजिता के फायदे और नुकसान हिंदी में 

अपराजिता Aparajita से संबंधित सही और स्टिक सभी जानकारी दी गई है जैसे कि अपराजिता के उपयोग तथा यह पौधा कितने प्रकार के होते हैं और उससे होने वाले फायदे और नुकसान जैसे संपूर्ण जानकारी दी गई है। 


आपको बता दें कि अपराजिता Aparajita plant गुणों से भरपूर प्रभावशाली और लाभकारी औषधि है जिसका उपयोग रसायन विज्ञान एवं घरेलू उपचार के लिए उपयोग किया जाता है. ताकि होने वाले विभिन्न प्रकार के रोगों से छुटकारा मिल सके।

अपराजिता के फूलों के आकर्षण के कारण घर के सजावट के लिए अधिकतर लगाए जाते हैं और यह पौधा भारत में सबसे अधिक पाए जाते हैं। भारत के अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग नामों से जाना जाता है जैसे अपराजिता , उपराजिता , अस्वखुरा , कोयला आदि नामों से जाना जाता है.पौधों के नाम से उसके गुणों के बारे में पता चलता है कि जो पराजित नहीं हो सकता उसे अपराजिता कहा गया है। 

 

 यदि नियम अनुसार इस पौधा को धारण एवं उपयोग किया जाए तो कभी किसी रोग या संकट से पराजित नहीं हो सकता। 


इस पौधा के गुण एवं कार्य क्षमता को देखते हुए हमारे ऋषि-मुनियों एवं विद्वान संतो ने इस Aparajita plant औषधि को नवीनीकरण किया है जिसका उपयोग आज से कई साल पहले से होते आ रहा है ताकि भविष्य में होने वाले रोगों से मुक्ति प्राप्त हो सके। 

आपको बता दें कि अपराजिता पौधा के सबसे ज्यादा उपयोग किए जाने वाले जड़ और इनके पुष्प हैं। 
 
 
Also Read : how to identify bhringraj plant. भृंगराज पौधे की पहचान कैसे करें

 

 Aparajita flower अपराजिता से होने वाले फायदे और नुकसान। 

अपराजिता एक दिव्य और शक्तिशाली एवं प्रभावशाली औषधि है जिसका उपयोग करने से अनेक प्रकार के रोगों से मुक्ति मिलती है आप जानते हैं कि हमारे देश में अनेक प्रकार की जड़ी बूटियां हैं और उसी जड़ी बूटियों में से एक अपराजिता है

तो आइए जानते हैं अपराजिता से होने वाले फायदे एवं नुकसान Aparajita plant

1. जिस व्यक्ति के आधे सिर का दर्द हैं उस व्यक्ति को अपराजिता की जड़ के रस निकाल कर दो से चार बूंद नाक में डाल दिया जाए तो सिर दर्द निश्चित रूप से ठीक हो जाता है।

2. यदि बुखार आता जाता है ठीक नहीं हो रहा है तो इस परिस्थिति में इस पौधा के जड़ को लाल धागों में बांधकर गले में धारण किया जाए तो अधिक से अधिक लाभ होता है और इसके अलावा अपराजिता की जड़ को काढ़ा बनाकर पीने से बुखार जल्द से जल्द ठीक हो जाता है।

3. यदि किसी व्यक्ति के पुराने एवं नई खांसी है और ठीक नहीं हो रहा है लगातार खासी से बेचैनी हो रही है तो इस परिस्थिति में अपराजिता की जड़ को लेकर उसमें 5 से 6 काली मिर्च एवं दो से तीन तुलसी के पत्ते गर्म पानी में काढ़ा बनाकर सेवन करते हैं तो निश्चित रूप से खांसी ठीक हो जाता है।

 

अथवा


जौंडिस, कब्ज, बुखार, सिर दर्द, खांसी में सेवन करने से जल्द ठीक हो जाता है।

Aparajita अपराजिता के पहचान कैसे करें.

आपको बता दें कि aparajita flowers पुष्प के आधार पर दो प्रजातियां पाई जाती हैं एक नीले पुष्पा वाली और एक सफेद पुष्पा वाली जिसमें 2 पत्ते वाली पुष्प होते हैं और एक सिंगल पत्ते वाले पुष्प होते हैं. इसे पहचान करने के लिए बहुत ही आसान तरीका है इसके लिए आपको ऊपर दिए गए इमेज में ध्यान से देखा होगा तभी आप पहचान कर पाएंगे। 

 

 

अपराजिता कितने प्रकार के होते हैं?

क्या अपराजिता और शंखपुष्पी एक ही है?

अपराजिता के फूल कब आते हैं?

अपराजिता के फूल कौन से भगवान को चढ़ते हैं?

 

Aparajita plant अपराजिता फूल कैसे लगाएं और अधिक से अधिक फूल कैसे प्राप्त करें।

Aprajita plant अपराजिता पौधा को लगाने के लिए सबसे पहले अपने आवश्यकता अनुसार अपराजिता का बीज ले ले और जिस स्थान पर पौधा को उगाना है उस स्थान पर भुरभुरा मिट्टी और बालू अथवा सड़ा हुआ गोबर मिट्टी और बालू के अनुसार 30 परसेंट गोबर की मात्रा होनी चाहिए। तीनों को एक मिश्रण मिट्टी तैयार करें उसके बाद अपराजिता के बीज को दो से 3 इंच गहरा मिट्टी के अंदर डाल दें हल्का पानी की आवश्यकता होगी।
इस कार्य को पूर्ण करने के बाद लगभग 1 हफ्ते के अंदर बीज से पौधा बाहर आ जाएंगे पौधा बाहर आने के बाद प्रतिदिन 4 से 5 घंटे धूप में रखें जिससे ग्रोइंग प्रक्रिया तेजी से होती हैं और पौधे 3 महीने के अंदर पुष्प देना शुरु कर देगा।

notice: यदि आप किसी भयंकर बीमारी से ग्रसित है तो इस औसधि के उपयोग/सेवन करने से पहले डॉक्टर से सलाह अवश्य ले लें।  अन्यथा आपके लिए हानिकारक हो सकता है।

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